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निदेशक की कलम से

प्रिय साथी नागरिकों,
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (एन.सी.जेड.सी.सी.) संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अन्तर्गत एक स्वायत्तशासी संस्था है जिसका उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति का संरक्षण, संवर्द्धन, प्रचार-प्रसार और अभिलेखीकरण (मुख्यतः लोक तथा जनजातीय) है। हमारे कार्यकलापों का कैनवास काफी वृहद है जिसमें गीत, संगीत, नृत्य, चित्रकला, हस्त शिल्प, शिल्प तथा साहित्य सभी शामिल हैं। यहां एन.सी.जेड.सी.सी. में हम सभी इस ध्येय के साथ काफी परिश्रम करते हैं कि हमारी सांस्कृतिक विरासत अपने मूल स्वरूप में संरक्षित रहे और देश के आम नागरिक उसकी समृद्धि तथा भव्यता से रूबरू हो सकें।

               मैंने एन.सी.जेड.सी.सी. के निदेशक का कार्यभार 6 अप्रैल, 2013 को सम्हाला। तब से लेकर अब तक 13 महीने से कुछ अधिक समय बीता है। यह 13 महीने की यात्रा, खोज, सीखने, योजना बनाने, टीमवर्क एवं उपलब्धियों की रही है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में हम लोग एन.सी.जेड.सी.सी. द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की संख्या और गुणवत्ता, दोनों में काफी बढ़ोत्तरी करने में सफल रहे। उसके परिणाम स्वरूप हम वित्तीय वर्ष 2013-14 में वर्ष 2012-13 की अपेक्षा 54 प्रतिशत अधिक कलाकारों को लाभान्वित करने में सफल हुए। एन.सी.जेड.सी.सी. का प्रेक्षागृह और कलावीथिका शायद इलाहाबाद शहर की अपने तरीके की सबसे अच्छी सुविधाएं हैं। हमने प्रेक्षागृह के वातानुकूलन को सही करवाया और कलावीथिका का जीर्णोद्धार किया। इसके परिणाम स्वरूप कला वीथिका की बुकिंग में जबरदस्त 274 प्रतिशत और प्रेक्षागृह की बुकिंग में 97 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। वर्ष 2013-14 में एन.सी.जेड.सी.सी. ने अपने संसाधनों द्वारा अर्जित आय में 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करी। उल्लेखनीय यह है कि ऐसा करने के लिये हमने एन.सी.जेड.सी.सी. की किसी भी सुविधा का शुल्क नहीं बढ़ाया और राष्ट्रीय शिल्प मेले के स्टालों के आवंटन शुल्क को घटा भी दिया। राष्ट्रीय शिल्प मेले की बात करें तो वर्ष 2013-14 के राष्ट्रीय शिल्प मेले में सारे पुराने कीर्तिमान ध्वस्त हो गये। इस शिल्प मेले में 10 दिन में 67059 टिकट बिके और शिल्पकारों ने 1.7 करोड़ रुपये का माल बेचा। यदि वर्ष 2012-13 से तुलना करें तो शिल्पकारों के माल की बिक्री में 331 प्रतिशत का इजाफा हुआ! कोई हैरानी की बात नहीं कि सभी शिल्पकार हमारे परिसर से मुस्कराते हुए गये और हमारे दिलों में एक खुशी छोड़ गये कि हम उनके जीवन स्तर को सुधारने में कुछ योगदान देने में सफल रहे। पहली बार हम ‘सोशल मीडिया प्लेटफार्म’ पर गये और हमारे फेसबुक पेज को 10 दिन में छः हजार से अधिक ‘लाइक’ मिलें।

               संक्षेप में कहें तो वित्तीय वर्ष 2013-14  उपलब्धियों और अभिनंदन का वर्ष रहा। हम चारों तरफ से मिली प्रशंसा से प्रसन्न हुए और विनम्र भी हुए। लेकिन सबसे अधिक सुखद एक ‘आम आदमी’ द्वारा लिखा गया प्रशंसा का पत्र था जिसे उन्होंने माघ मेले में होने वाले हमारे वार्षिक कार्यक्रम ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ का देखकर लिखा। इस प्रशंसा पत्र तथा अनेकों अन्य प्रशंसा पत्रों ने हमें यह बताया कि हम सही रास्ते पर हैं और साथ ही हमें अपनी प्रदर्शन को लगातार बेहतर करने के लिए उत्प्रेरित भी किया।

               चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 एक महीना पुराना हो चुका है और आम चुनावों के बावजूद इसने काफ़ी गतिविधि देख ली है। हम लोगों ने काफी अच्छे स्तर पर ‘मतदाता जागरुकता अभियान’ में इलाहाबाद और कौशाम्बी जनपदों और उसके आस-पास के क्षेत्रों में हिस्सा लिया। हमारे प्रयासों को चुनाव पर्यवेक्षकों एवं मीडिया दोनों ने सराहा। .मई-जून के भीषण गर्मी के मौसम में हम लोगों ने प्रेक्षागृह की पुरानी-बेकार हो चुकी छत-को सफलतापूर्वक बदल दिया है और अब हम ‘ग्रीन रूमों’ तथा प्रेक्षागृह के समग्र  रख-रखाव पर ध्यान दे रहे हैं। इस वर्ष हम लोगों ने विगत कई वर्षों से बन्द पड़ी ‘मासिक नाट्य योजना’ को फिर से प्रारम्भ किया है और हमंे दर्शकों की बड़ी उत्साहवर्द्धक प्रतिक्रिया मिल रही है।

               व्यक्तिगत रूप से बतौर निदेशक, एन.सी.जेड.सी.सी. मैं लगातार इस प्रयास में हूँ कि केन्द्र के सभी कार्यकलापों-कार्यक्रमों से लेकर आधारभूत ढाँचे के रख-रखाव तक-और केन्द्र में आने वाले सम्मानित आगन्तुकों के प्रति केन्द्र के कर्मचारियों के व्यवहार तक सभी पहलुओं में गुणवत्ता बढ़े। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि एन.सी.जेड.सी.सी. को बेहतर करने में हमें आपका बहुमूल्य सहयोग मिलता रहेगा।
साभार
आपका

 

(गौरव कृष्ण बंसल)
आई.आर.टी.एस.
निदेशक


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